Lagat › मकान बनाने का खर्च प्रति स्क्वायर फ़ीट
मकान बनाने का खर्च — प्रति स्क्वायर फ़ीट कैसे निकालें
यह सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल है, और सबसे ज़्यादा गुमराह करने वाला भी। "कितने रुपये फुट पड़ेगा?" का कोई एक जवाब नहीं है — और जो लोग तुरंत एक संख्या बता देते हैं, वे आम तौर पर यह नहीं बताते कि उसमें क्या-क्या शामिल है।
पहले यह समझिए कि भाव अकेला बेमानी है
मान लीजिए दो लोग कहते हैं कि उनका मकान "बारह सौ रुपये फुट" में बना। दोनों सच बोल रहे हो सकते हैं और फिर भी दोनों के खर्च में दोगुने का अंतर हो सकता है — क्योंकि:
- एक ने सिर्फ़ ढाँचा गिना, दूसरे ने फ़िनिशिंग भी।
- एक के भाव में सामग्री शामिल थी, दूसरे के में सिर्फ़ मज़दूरी।
- एक ने बिजली-प्लंबिंग जोड़ी, दूसरे ने अलग रखी।
- एक ने क्षेत्रफल अलग तरीक़े से गिना।
यानी तुलना करने से पहले दोनों तरफ़ एक ही चीज़ गिनना ज़रूरी है। इसीलिए इस पन्ने पर हम आपको कोई "भारत का औसत भाव" नहीं बता रहे — वह असल में कोई चीज़ है ही नहीं। जो काम का है वह यह है कि आप अपनी संख्या ख़ुद कैसे निकालें।
क़दम 1 — बिल्ट-अप एरिया सही गिनिए
यह वह क्षेत्रफल है जो असल में बना है, हर मंज़िल का जोड़कर — दीवारों की मोटाई सहित। प्लॉट का आकार नहीं।
| क्या | गिना जाएगा? |
|---|---|
| भूतल का ढका हुआ हिस्सा | हाँ |
| पहली, दूसरी मंज़िल | हाँ, अलग-अलग जोड़कर |
| सीढ़ी और उसका ढाँचा | हाँ |
| छत पर बना कमरा या मुमटी | हाँ |
| खुली छत, बिना छत का आँगन | नहीं |
| प्लॉट का बचा हुआ खुला हिस्सा | नहीं |
| बाउंड्री वॉल | नहीं — इसे अलग खर्च रखिए |
१०० गज (लगभग ९०० वर्ग फुट) के प्लॉट पर अगर आप भूतल और पहली मंज़िल बनाते हैं और हर मंज़िल पर ७०० फुट ढका है, तो बिल्ट-अप एरिया ७०० + ७०० = १,४०० वर्ग फुट है, ९०० नहीं। यह ग़लती बहुत आम है और इससे भाव क़रीब आधा दिखने लगता है।
क़दम 2 — निर्माण का कुल खर्च जोड़िए
इसमें वह सब आता है जो मकान खड़ा करने में लगा:
- सामग्री — सीमेंट, ईंट, रेत, बजरी, सरिया, टाइल, लकड़ी, पेंट
- मज़दूरी और ठेकेदार — सिविल, बढ़ई, पेंटर
- बिजली का काम और सामान
- प्लंबिंग और सैनिटरी
- ढुलाई, पानी का टैंकर, किराए का सामान (शटरिंग, मिक्सर, लिफ़्ट)
क़दम 3 — जो निर्माण नहीं है, उसे अलग रखिए
यह वह जगह है जहाँ ज़्यादातर लोगों का आँकड़ा बिगड़ता है। ये खर्च असली हैं और आपकी जेब से ही जाते हैं, पर निर्माण लागत प्रति फुट में नहीं गिने जाते — क्योंकि इनका मकान के आकार से कोई सीधा रिश्ता नहीं:
- ज़मीन या प्लॉट की क़ीमत
- रजिस्ट्री, स्टाम्प ड्यूटी, वकील
- नक्शा बनवाना और पास कराना
- बिजली और पानी का कनेक्शन
- फ़र्नीचर, पर्दे, एसी, बर्तन
- गृह प्रवेश और पूजा
इन्हें अलग रखिए — पर लिखिए ज़रूर। कुल कितना पैसा लगा, यह जानने के लिए ये भी चाहिए; बस प्रति फुट वाले हिसाब से बाहर रहेंगे।
क़दम 4 — भाग दे दीजिए
निर्माण का कुल खर्च ÷ बिल्ट-अप एरिया = आपकी लागत प्रति फुट उदाहरण: ₹२१,००,००० का निर्माण ÷ १,४०० वर्ग फुट = ₹1,500 प्रति फुट।
यही आपकी असली संख्या है। किसी और की बताई हुई नहीं, आपके अपने बिलों से निकली हुई।
यह संख्या तभी निकलती है जब हिसाब रखा हो
यह पूरा गणित एक ही चीज़ पर टिका है — कि आपके पास हर खर्च का तारीख़वार रिकॉर्ड हो, और सामग्री, मज़दूरी और ज़मीन-काग़ज़ के खर्च अलग-अलग दर्ज हों। अगर सब एक ही ढेर में लिखा है, तो आठ महीने बाद इन्हें अलग करना लगभग नामुमकिन है।
इसीलिए खर्च दर्ज करते समय श्रेणी लिखना ज़रूरी है — यह सामग्री थी, यह मज़दूरी, यह क़ानूनी खर्च। तरीक़ा खर्च कैसे लिखें वाले पन्ने पर है।
भाव तय करते समय यह ज़रूर पूछिए
जब ठेकेदार प्रति फुट भाव बताए, तो तीन सवाल पूछिए और जवाब लिखकर रखिए:
- इसमें सामग्री शामिल है या सिर्फ़ मज़दूरी? — यही सबसे बड़ा फ़र्क़ है। सिर्फ़ मज़दूरी का भाव कुछ सौ रुपये फुट होता है; सामग्री सहित वही काम कई गुना ऊपर जाता है।
- कहाँ तक का काम है? — सिर्फ़ ढाँचा और प्लास्टर, या टाइल-पेंट-फ़िनिशिंग भी।
- बिजली और प्लंबिंग इसमें है? — आम तौर पर नहीं होती, और यही बाद में "यह तो अलग से है" वाली बहस बनती है।
इन तीनों का जवाब लिखे बिना कोई भी भाव तुलना के लायक़ नहीं है। विस्तार से यह ठेकेदार से बनवाएँ या ख़ुद सामान लेकर वाले पन्ने पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
तो फिर बजट का शुरुआती अंदाज़ा कैसे लगाऊँ?
अपने ही शहर में, पिछले साल-दो साल में बने दो-तीन मकानों का असली आँकड़ा पूछिए — और हर बार यह भी पूछिए कि उसमें क्या शामिल था और क्षेत्रफल कैसे गिना। इंटरनेट पर मिले किसी राष्ट्रीय औसत से यह कहीं ज़्यादा भरोसेमंद है, क्योंकि सामग्री के भाव और मज़दूरी की दर हर शहर में अलग होती है।
क्या ऊपर की मंज़िल सस्ती पड़ती है?
आम तौर पर हाँ, प्रति फुट के हिसाब से — क्योंकि नींव, प्लॉट की तैयारी और मुख्य कनेक्शन एक बार ही लगते हैं और सब मंज़िलों पर बँट जाते हैं। इसीलिए एक ही मकान का "प्रति फुट" भाव मंज़िल बढ़ने पर थोड़ा नीचे आता है।
फ़िनिशिंग से कितना फ़र्क़ पड़ता है?
बहुत। ढाँचा लगभग सबका एक जैसा बनता है; अंतर टाइल, दरवाज़े, रसोई, बाथरूम फ़िटिंग और पेंट में आता है। दो मकान एक ही ढाँचे पर बनकर भी फ़िनिशिंग की वजह से बहुत अलग लागत पर बैठ सकते हैं — इसलिए भाव पूछते समय फ़िनिशिंग का स्तर भी तय कीजिए।
Lagat में प्रति फुट
क्षेत्रफल और भाव डालिए, कुल बजट अपने आप बनता है — और सिविल भाव के साथ यह दर्ज होता है कि उसमें सिर्फ़ मज़दूरी है या सामग्री भी। खर्च श्रेणीवार दर्ज होते हैं, इसलिए साल के आख़िर में सामग्री, मज़दूरी और क़ानूनी खर्च अलग-अलग निकल आते हैं। एक व्यक्ति के लिए हमेशा मुफ़्त।